अति अपार जे सरित बर जौं
अति अपार जे सरित बर जौं
दोहा १३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं। चढ़ि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं॥ १३ ॥
अर्थ
जो अत्यन्त बड़ी श्रेष्ठ नदियाँ हैं, यदि राजा उन पर पुल बाँधा देता है तो अत्यन्त छोटी चींटियाँ भी उन पर चढ़कर बिना ही परिश्रम के पार चली जाती हैं [इसी प्रकार मुनियों के वर्णन के सहारे मैं भी श्रीरामचरित्र का वर्ण सहज ही कर सकूँगा]।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का दोहा १३ है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।
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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता