एहि बिधि बीते बरष षट सहस

दोहा १४४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

एहि बिधि बीते बरष षट सहस बारि आहार। संबत सप्त सहस्र पुनि रहे समीर अधार॥ १४४ ॥

अर्थ

इस प्रकार जल का आहार [करके तप] करते छः हजार वर्ष बीत गये। फिर सात हजार वर्ष वे वायु के आधार पर रहे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४४ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान