ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई

चौपाई ४, दोहा १४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई॥ जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजिहि अभिलाषा॥ ४ ॥

अर्थ

ऐसे [महान] प्रभु भी सेवक के वश में हैं और भक्तों के लिये [दिव्य] लीलाविग्रह धारण करते हैं। यदि वेदों में यह वचन सत्य कहा है तो हमारी अभिलाषा भी अवश्य पूरी होगी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान