ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना
ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना
छन्द ३, दोहा ३२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
छन्द पाठ
ए दारिका परिचारिका करि पालिबीं करुना नई। अपराधु छमिबो बोलि पठए बहुत हौं ढीट्यो कई॥ पुनि भानुकुलभूषन सकल सनमान निधि समधी किए। कहि जाति नहिं बिनती परस्पर प्रेम परिपूरन हिए॥ ३ ॥
अर्थ
इन लड़कियों को टहलनी मानकर, नयी-नयी दया करके पालन कीजिएगा। मैंने बड़ी ढीठाई की कि आपको यहाँ बुला भेजा, अपराध क्षमा कीजिएगा। फिर सूर्यकुल के भूषण दशरथजी ने समधी जनकजी को सम्पूर्ण सम्मान की निधि कर दिया (इतना सम्मान किया कि वे सम्मान के भण्डार ही हो गये)। उनकी परस्पर की विनती कही नहीं जाती, दोनों के हृदय प्रेम से परिपूर्ण हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का छन्द ३, दोहा ३२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह