कर जोरि जनकु बहोरि बंधु समेत
कर जोरि जनकु बहोरि बंधु समेत
छन्द २, दोहा ३२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
छन्द पाठ
कर जोरि जनकु बहोरि बंधु समेत कोसलराय सों। बोले मनोहर बयन सानि सनेह सील सुभाय सों॥ संबंध राजन रावरें हम बड़े अब सब बिधि भए। एहि राज साज समेत सेवक जानिबे बिनु गथ लए॥ २ ॥
अर्थ
फिर जनकजी भाई सहित हाथ जोड़कर कोसलाधीश दशरथजी से स्नेह, शील और सुन्दर प्रेम में सानकर मनोहर वचन बोले--हे राजन्! आपके साथ सम्बन्ध हो जाने से अब हम सब प्रकार से बड़े हो गये। इस राज-पाट सहित हम दोनों को आप बिना दाम के लिये हुए सेवक ही समझियेगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का छन्द २, दोहा ३२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह