भूपति भवन कोलाहलु होई
भूपति भवन कोलाहलु होई
चौपाई ४, दोहा ३४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भूपति भवन कोलाहलु होई। जाइ न बरनि समउ सुखु सोई॥ कौसल्यादि राम महतारीं। प्रेमबिबस तन दसा बिसारीं॥ ४ ॥
अर्थ
राजमहल में [आनन्द के मारे] शोर मच रहा है। उस समय का और सुख का वर्णन नहीं किया जा सकता। कौसल्याजी आदि श्रीरामचन्द्रजी की सब माताएँ प्रेम के वश होने से शरीर की सुध भूल गयीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना