अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ

चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ॥ कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई॥ ४ ॥

अर्थ

नीच अजामिल, गज और गणिका (वेश्या) भी श्रीहरि के नाम के प्रभाव से मुक्त हो गये। मैं नाम की बड़ाई कहाँ तक कहूँ, राम भी नाम के गुणों को नहीं गा सकते।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा