धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला

चौपाई २, दोहा १३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला॥ दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा॥ २ ॥

अर्थ

कृपालु भगवान्‌ भी राजा का शरीर धारण कर वहाँ जा पहुँचे। राजकुमारी ने हर्षित होकर उनके गले में जयमाला डाल दी। लक्ष्मीनिवास भगवान् दुलहिन को ले गये। सारा नृपसमाज निराश हो गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग