धरि धीरजु एक आलि सयानी
धरि धीरजु एक आलि सयानी
चौपाई १, दोहा २३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी॥ बहुरि गौरि कर ध्यान करेहू। भूपकिसोर देखि किन लेहू॥ १ ॥
अर्थ
एक चतुर सखी धीरज धरकर, हाथ पकड़कर सीताजी से बोली—गिरिजाजी का ध्यान फिर कर लेना, इस समय राजकुमार को क्यों नहीं देख लेतीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन