देव पितर पूजे बिधि नीकी
देव पितर पूजे बिधि नीकी
चौपाई १, दोहा ३५१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की॥ सबहि बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना॥ १ ॥
अर्थ
मन की सभी वासनाएँ पूरी हुई जानकर देवता और पितरों का भलीभाँति पूजन किया। सबकी वन्दना करके माताएँ यही वरदान माँगती हैं कि भाइयों सहित श्रीरामजी का कल्याण हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना