लोक रीति जननीं करहिं बर दुलहिनि
लोक रीति जननीं करहिं बर दुलहिनि
दोहा ३५० (ख) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
लोक रीति जननीं करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं। मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसुकाहिं॥ ३५० (ख) ॥
अर्थ
माताएँ लोकरीति करती हैं और दूलह-दुलहिनें सकुचाते हैं। इस महान् आनन्द और विनोद को देखकर श्रीरामचन्द्रजी मन-ही-मन मुसकरा रहे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३५० (ख) है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना