देव जच्छ गंधर्ब नर किंनर नाग
देव जच्छ गंधर्ब नर किंनर नाग
दोहा १८२ (ख) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
देव जच्छ गंधर्ब नर किंनर नाग कुमारि। जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि॥ १८२ (ख) ॥
अर्थ
देवता, यक्ष, गन्धर्व, मनुष्य, किन्नर और नागों की कन्याओं तथा बहुत-सी अन्य सुन्दरी और उत्तम स्त्रियों को उसने अपनी भुजाओं के बल से जीतकर ब्याह लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १८२ (ख) है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार