इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ

चौपाई १, दोहा १८३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ। सो सब जनु पहिलहिं करि रहेऊ॥ प्रथमहिं जिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा। तिन्ह कर चरित सुनहु जो कीन्हा॥ १ ॥

अर्थ

इंद्रजीत से उसने जो कुछ कहा, उसे उसने मानो पहले से ही कर रखा था (अर्थात् रावण के कहने भर की देर थी, उसने आज्ञापालन में तनिक भी देर नहीं की)। जिनको पहले ही आज्ञा दे रखी थी, उन्होंने जो करतूतें कीं उन्हें सुनो--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार