भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ
भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ
दोहा १८२ (क) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र। मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र॥ १८२ (क) ॥
अर्थ
उसने भुजाओं के बल से सारे विश्व को वश में कर लिया, किसी को स्वतन्त्र नहीं रहने दिया। [इस प्रकार] मण्डलीक राजाओं का शिरोमणि (सार्वभौम सम्राट) रावण अपने इच्छानुसार राज्य करने लगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १८२ (क) है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार