देखि सीय सोभा सुखु पावा
देखि सीय सोभा सुखु पावा
चौपाई ३, दोहा २३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि सीय सोभा सुखु पावा। हृदयँ सराहत बचनु न आवा॥ जनु बिरंचि सब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई॥ ३ ॥
अर्थ
सीताजी की शोभा देखकर श्रीरामजी ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उसकी सराहना करते हैं, किन्तु मुख से वचन नहीं निकलते। [वह शोभा ऐसी अनुपम है] मानो ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान करके संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन