देखि रूप मुनि बिरति बिसारी
देखि रूप मुनि बिरति बिसारी
चौपाई १, दोहा १३१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी॥ लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने॥ १ ॥
अर्थ
उसके रूप को देखकर मुनि वैराग्य भूल गये और बड़ी देर तक उसकी ओर देखते ही रह गये। उसके लक्षण देखकर मुनि अपने-आप को भी भूल गये और हृदय में हर्षित हुए, पर प्रकट रूप में उन लक्षणों को नहीं कहा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग