आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि

दोहा १३० · बालकाण्ड

दोहा पाठ

आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि। कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि॥ १३० ॥

अर्थ

[फिर] राजा ने राजकुमारी को लाकर नारदजी को दिखलाया [और पूछा कि--] हे नाथ! आप अपने हृदय में विचारकर इस के सब गुण-दोष कहिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३० है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग