देखि महीप सकल सकुचाने

चौपाई २, दोहा २६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने॥ गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा॥ २ ॥

अर्थ

इन्हें देखकर सब राजा सकुचा गये, मानो बाज के झपटने पर बटेर लुक (छिप) गये हों। गोरे शरीर पर विभूति बड़ी फब रही है और विशाल ललाट पर त्रिपुण्ड्र विशेष शोभा दे रहा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना