खरभरु देखि बिकल पुर नारीं

चौपाई १, दोहा २६८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं॥ तेहिं अवसर सुनि सिवधनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥ १ ॥

अर्थ

खलबली देखकर जनकपुर की स्त्रियाँ व्याकुल हो गयीं और सब मिलकर राजाओं को गालियाँ देने लगीं। उसी मौके पर शिवजी के धनुष का टूटना सुनकर भृगुकुलरूपी कमल के सूर्य परशुरामजी आये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

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जयमाल पहनाना