देखि लोग सब भए सुखारे
देखि लोग सब भए सुखारे
चौपाई २, दोहा २४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे॥ हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई॥ २ ॥
अर्थ
उन्हें देखकर सब लोग सुखी हुए। नेत्र एकटक (निमेषशून्य) हैं और तारे (पुतलियाँ) भी नहीं चलते। जनकजी दोनों भाइयों को देखकर हर्षित हुए। तब उन्होंने जाकर मुनि के चरणकमल पकड़ लिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश