कटि तूनीर पीत पट बाँधें
कटि तूनीर पीत पट बाँधें
चौपाई १, दोहा २४४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कटि तूनीर पीत पट बाँधें। कर सर धनुष बाम बर काँधें॥ पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए॥ १ ॥
अर्थ
कमर में तरकस और पीताम्बर बाँधे हैं। [दाहिने] हाथों में बाण और बायें सुन्दर कंधों पर धनुष तथा पीले यज्ञोपवीत (जनेऊ) सुशोभित हैं। नख से लेकर शिखा तक सब अंग सुन्दर हैं, उन पर महान् शोभा छायी हुई है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश