देखहिं रूप महा रनधीरा

चौपाई ३, दोहा २४१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा॥ डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी। मनहुँ भयानक मूरति भारी॥ ३ ॥

अर्थ

महान् रणधीर प्रभु के रूप को ऐसा देख रहे हैं, मानो वीर-रस शरीर धारण किये हुए हों। कुटिल राजा प्रभु को देखकर डर गये, मानो बड़ी भयानक मूर्ति हो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश