रहे असुर छल छोनिप बेषा

चौपाई ४, दोहा २४१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट काल सम देखा॥ पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई॥ ४ ॥

अर्थ

छल से जो राक्षस वहाँ राजाओं के वेष में [बैठे] थे, उन्होंने प्रभु को प्रत्यक्ष काल के समान देखा। नगरनिवासियों ने दोनों भाइयों को मनुष्यों के भूषणरूप और नेत्रों को सुख देनेवाला देखा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश