देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई
देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई
चौपाई २, दोहा १३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोरि उपहास कराई॥ बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी॥ २ ॥
अर्थ
[मन में सोचते जाते थे--] जाकर या तो शाप दूँगा या प्राण दे दूँगा। उन्होंने जगत् में मेरी हँसी करायी। दैत्यों के शत्रु भगवान् हरि उन्हें बीच रास्ते में ही मिल गये। साथ में लक्ष्मीजी और वही राजकुमारी थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग