बोले मधुर बचन सुरसाईं
बोले मधुर बचन सुरसाईं
चौपाई ३, दोहा १३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं॥ सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा॥ ३ ॥
अर्थ
देवताओं के स्वामी भगवान् ने मीठी वाणी में कहा--हे मुनि! व्याकुल की तरह कहाँ चले? ये शब्द सुनते ही नारद को बड़ा क्रोध आया; माया के वशीभूत होने के कारण मन में चेत नहीं रहा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग