दासीं दास तुरग रथ नागा
दासीं दास तुरग रथ नागा
चौपाई ४, दोहा १०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥ अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥ ४ ॥
अर्थ
दासी, दास, घोड़े, रथ, हाथी, गायें, वस्त्र, मणि और वस्तु-विभाग, अन्न तथा सोने के बर्तन भर कर दिये गये। दहेज दिया गया, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह