दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन

चौपाई ४, दोहा २४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन। जन मन अमित नाम किए पावन॥ निसिचर निकर दले रघुनंदन। नामु सकल कलि कलुष निकंदन॥ ४ ॥

अर्थ

प्रभु श्रीरामजी ने [भयानक] दण्डक वन को सुहावना बनाया, परन्तु नाम ने असंख्य मनुष्यों के मनों को पवित्र कर दिया। श्रीरघुनाथजी ने राक्षसों के समूह को मारा, परन्तु नाम तो कलियुग के सारे पापों की जड़ उखाड़नेवाला है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा