दच्छ न कछु पूछी कुसलाता
दच्छ न कछु पूछी कुसलाता
चौपाई २, दोहा ६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता॥ सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा॥ २ ॥
अर्थ
दक्ष ने तो उनकी कुछ कुशल तक नहीं पूछी, सतीजी को देखकर उलटे उनके सारे अंग जल उठे। तब सती ने जाकर यज्ञ देखा तो वहाँ कहीं शिवजी का भाग दिखायी नहीं दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का दक्ष यज्ञ में जाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का दक्ष के यज्ञ में जाना और शिवजी के अपमान से उनका क्रोधित होना का वर्णन है।
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सती का दक्ष यज्ञ में जाना