पिता भवन जब गईं भवानी

चौपाई १, दोहा ६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पिता भवन जब गईं भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी॥ सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता॥ १ ॥

अर्थ

भवानी जब पिता (दक्ष) के घर पहुँचीं, तब दक्ष के डर के मारे किसी ने उनकी आवभगत नहीं की, केवल एक माता भली ही आदर से मिली। बहिनें बहुत मुसकराती हुई मिलीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सती का दक्ष यज्ञ में जाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का दक्ष के यज्ञ में जाना और शिवजी के अपमान से उनका क्रोधित होना का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
सती का दक्ष यज्ञ में जाना