चितवहिं चकित बिचित्र बिताना

चौपाई ३, दोहा ३१४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना॥ नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना॥ ३ ॥

अर्थ

विचित्र बितानों को तथा नाना प्रकार की सब अलौकिक रचनाओं को वे चकित होकर देख रहे हैं। नगर के स्त्री-पुरुष रूप के भण्डार, सुघड़, श्रेष्ठ धर्मात्मा, सुशील और सुजान हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत