चढ़ि बर बाजि बार एक राजा
चढ़ि बर बाजि बार एक राजा
चौपाई २, दोहा १५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा॥ बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ॥ २ ॥
अर्थ
एक बार वह राजा एक अच्छे घोड़े पर सवार होकर, शिकार का सब सामान सजाकर विंध्याचल के घने जंगल में गया और वहाँ उसने बहुत-से उत्तम-उत्तम हिरन मारे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा