हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना
हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना
चौपाई १, दोहा १५६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना॥ करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी॥ १ ॥
अर्थ
[राजा के] हृदय में किसी फल की टोह (कामना) न थी। राजा बड़ा ही बुद्धिमान् और ज्ञानी था। वह ज्ञानी राजा कर्म, मन और वाणी से जो कुछ भी धर्म करता था, सब भगवान् वासुदेव को अर्पित करके करता था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा