चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति
चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति
दोहा १०२ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
चले संग हिमवंतु तब पहुँचावन अति हेतु। बिबिध भाँति परितोषु करि बिदा कीन्ह बृषकेतु॥ १०२ ॥
अर्थ
तब हिमवान् अत्यन्त प्रेम से शिवजी को पहुँचाने के लिये साथ चले। वृषकेतु (शिवजी) ने बहुत तरह से उन्हें सन्तोष कराकर विदा किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का दोहा १०२ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह