बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु
बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु
दोहा १७३ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार। जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार॥ १७३ ॥
अर्थ
तब ब्राह्मण क्रोधसहित बोल उठे-उन्होंने कुछ भी विचार नहीं किया--अरे मूर्ख राजा! तू जाकर परिवार सहित राक्षस हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १७३ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा