भयउ रसोईं भूसुर माँसू

चौपाई ४, दोहा १७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भयउ रसोईं भूसुर माँसू। सब द्विज उठे मानि बिस्वासू॥ भूप बिकल मति मोहँ भुलानी। भावी बस आव मुख बानी॥ ४ ॥

अर्थ

रसोई में ब्राह्मणों का मांस बना है। [आकाशवाणी का] विश्वास मानकर सब ब्राह्मण उठ खड़े हुए। राजा व्याकुल हो गया। [परन्तु] उसकी बुद्धि मोह में भूली हुई थी। होनहारवश उसके मुँह से [एक] बात [भी] न निकली।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा