बिस्व बिजय जसु जानकि पाई

चौपाई ३, दोहा ३५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई॥ सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे॥ ३ ॥

अर्थ

विश्व विजय के यश और जानकी को पाकर, आए भवन ब्याहि सब भाई। तुम्हारे सभी कर्म अमानुष हैं (मनुष्य की शक्ति के बाहर हैं), जिन्हें केवल कौसिक कृपा से सुधारे है (सम्पन्न किया है)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना