आजु सुफल जग जनमु हमारा

चौपाई ४, दोहा ३५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आजु सुफल जग जनमु हमारा। देखि तात बिधुबदन तुम्हारा॥ जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें। ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें॥ ४ ॥

अर्थ

हे तात! तुम्हारा चन्द्रमुख देखकर आज हमारा जग में जन्म लेना सफल हुआ। तुमको बिना देखे जो दिन बीते हैं, उनको ब्रह्मा गिनती में न लावें (हमारी आयु में शामिल न करें)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना