चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं

दोहा २९४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ। भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ॥ २९४ ॥

अर्थ

और जल्दी चलो। गुरुजी के ऐसे वचन सुनकर, 'हे नाथ! बहुत अच्छा' कहकर और सिर नवाकर तथा दूतों को डेरा दिलवाकर राजा महल में गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का दोहा २९४ है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान