बिप्र श्राप तें दूनउ भाई
बिप्र श्राप तें दूनउ भाई
चौपाई ३, दोहा १२२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिप्र श्राप तें दूनउ भाई। तामस असुर देह तिन्ह पाई॥ कनककसिपु अरु हाटकलोचन। जगत बिदित सुरपति मद मोचन॥ ३ ॥
अर्थ
उन दोनों भाइयों ने ब्राह्मण (सनकादि) के शाप से असुरों का तामसी शरीर पाया। एक का नाम था हिरण्यकशिपु और दूसरे का हिरण्याक्ष। ये देवराज इन्द्र के गर्व को छुड़ाने वाले सारे जगत् में प्रसिद्ध हुए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु