बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा
बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा
चौपाई ४, दोहा ९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा॥ नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी॥ ४ ॥
अर्थ
भोजन करने वालों की बहुत-सी पाँतियाँ बैठीं। चतुर रसोइये परोसने लगे। स्त्रियों की मण्डलियाँ देवताओं को भोजन करते जान कर कोमल वाणी से गालियाँ देने लगीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात