भूप भवनु तेहि अवसर सोहा

चौपाई १, दोहा ३४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भूप भवनु तेहि अवसर सोहा। रचना देखि मदन मनु मोहा॥ मंगल सगुन मनोहरताई। रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई॥ १ ॥

अर्थ

उस समय राजमहल अत्यन्त शोभित हो रहा था। उसकी रचना देखकर कामदेव का भी मन मोहित हो जाता था। मंगल शकुन, मनोहरता, ऋद्धि-सिद्धि, सुख और सुहावनी सम्पदा वहाँ शोभा पा रही थीं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना