भूषन सकल सुदेस सुहाए
भूषन सकल सुदेस सुहाए
चौपाई २, दोहा २४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए॥ रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी॥ २ ॥
अर्थ
सब आभूषण अपनी-अपनी जगह पर शोभित हैं, जिन्हें सखियों ने अंग-अंग में भलीभाँति सजाकर पहनाया है। जब सीताजी ने रंगभूमि में पैर रखा, तब उनका [दिव्य] रूप देखकर स्त्री-पुरुष--सभी मोहित हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।
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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश