चलीं संग लै सखीं सयानी
चलीं संग लै सखीं सयानी
चौपाई १, दोहा २४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चलीं संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी॥ सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी॥ १ ॥
अर्थ
सयानी सखियाँ सीताजी को साथ लेकर मनोहर वाणी से गीत गाती हुई चलीं। सीताजी के नवल शरीर पर सुन्दर साड़ी सुशोभित है। जगज्जननी की महान् छबि अतुलनीय है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।
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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश