भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न

दोहा १७४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर। किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर॥ १७४ ॥

अर्थ

हे राजन्‌! यद्यपि तुम्हारा दोष नहीं है, तो भी होनहार नहीं मिटती। ब्राह्मणों का शाप बहुत ही भयानक होता है, यह किसी तरह भी टाला नहीं जा सकता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १७४ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा