अस कहि सब महिदेव सिधाए
अस कहि सब महिदेव सिधाए
चौपाई १, दोहा १७५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए॥ सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिरचत हंस काग किय जेहीं॥ १ ॥
अर्थ
ऐसा कहकर सब महिदेव चले गये। नगरवासियों ने [जब] यह समाचार पाया, तो वे चिन्ता करने और विधाता को दोष देने लगे, जिसने हंस बनाते-बनाते कौआ कर दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा