तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा

चौपाई ४, दोहा १७४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा। फिरेउ राउ मन सोच अपारा॥ सब प्रसंग महिसुरन्ह सुनाई। त्रसित परेउ अवनीं अकुलाई॥ ४ ॥

अर्थ

वहाँ न भोजन था, न रसोइया ब्राह्मण ही था। तब राजा मन में अपार चिन्ता करता हुआ लौटा। उसने ब्राह्मणों को सब वृत्तान्त सुनाया और [बड़ा ही] भयभीत और व्याकुल होकर वह पृथ्वी पर गिर पड़ा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा