जनु उछाह सब सहज सुहाए

चौपाई २, दोहा ३४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जनु उछाह सब सहज सुहाए। तनु धरि धरि दसरथ गृहँ छाए॥ देखन हेतु राम बैदेही। कहहु लालसा होहि न केही॥ २ ॥

अर्थ

और सब प्रकार के उत्साह (आनन्द) मानो सहज सुन्दर शरीर धर-धरकर दशरथजी के घर में छा गये हैं। श्रीरामचन्द्रजी और सीताजी के दर्शन के लिये भला कहिये, किसे लालसा न होगी?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना