आयसु करहिं सकल भयभीता

चौपाई ७, दोहा १८२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता॥ ७ ॥

अर्थ

डर के मारे सभी उसकी आज्ञा का पालन करते थे और नित्य आकर विनीत होकर उसके चरणों में सिर नवाते थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा १८२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार