भृकुटि बिलास नचावइ ताही

चौपाई ३, दोहा २०० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही॥ मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई॥ ३ ॥

अर्थ

भगवान् उस मायाको भौंह के इशारे पर नचाते हैं। ऐसे प्रभुको छोड़कर कहो, किसका भजन किया जाय। मन, वचन और कर्म से चतुराई छोड़कर भजते ही श्रीरघुनाथजी कृपा करेंगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला