एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा
एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा
चौपाई ४, दोहा २०० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा॥ लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालने घालि झुलावै॥ ४ ॥
अर्थ
इस प्रकार प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने बालक्रीड़ा की और समस्त नगरवासियों को सुख दिया। कौसल्याजी कभी उन्हें गोद में लेकर हिलाती-डुलातीं और कभी पालने में लिटाकर झुलातीं थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला